
समीर वानखेड़े:
औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। आरटीआई कार्यकर्ता केतन तिरोडकर ने याचिका दायर की है। केतन तिरोडकर ने याचिका में कहा है कि औरंगजेब का मकबरा राष्ट्रीय स्मारकों की परिभाषा में फिट नहीं बैठता और इसमें अगली पीढ़ी के लिए विरासत में पाने या सीखने के लिए कुछ भी नहीं है। इसलिए याचिका में मांग की गई है कि केंद्रीय पुरातत्व विभाग को औरंगजेब के मकबरे को ऐतिहासिक स्मारकों की सूची से हटाने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही सुनवाई होने की उम्मीद है।
सरकार को औरंगजेब का मकबरा स्थायी रूप से हटा देना चाहिए।
केतन तिरोडकर ने राय व्यक्त की है कि राज्य सरकार को मकबरे को पुरातत्व विभाग की सूची से हटा देना चाहिए या इसे वहां से स्थायी रूप से हटा देना चाहिए ताकि भविष्य में फिर से सांप्रदायिक दरार पैदा न हो। इसके अलावा याचिका में राज्य सरकार से फिल्म छावा के प्रदर्शन पर फिलहाल रोक लगाने पर विचार करने का भी अनुरोध किया गया है। इस बीच औरंगजेब के मकबरे से राज्य में माहौल गर्म होता नजर आ रहा है। औरंगजेब के मकबरे को ध्वस्त करने के मुद्दे पर नागपुर में भी दंगे भड़क उठे। इस घटना के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
औरंगजेब के मकबरे को लेकर राज्य में माहौल गरम है।
पिछले कुछ दिनों से राज्य में औरंगजेब के मकबरे को लेकर विवाद चल रहा है। खुल्ताबाद में कब्रों को हटाने के लिए हिंदूवादी संगठनों द्वारा पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। औरंगजेब के मकबरे को लेकर चल रहे विवाद के कारण नागपुर में दंगा हो गया है। मराठवाड़ा में भी तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। औरंगजेब का मकबरा छत्रपति संभाजीनगर के खुल्ताबाद में स्थित है। पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र से औरंगजेब का मकबरा उखाड़ने की मांग हो रही है। इसके अलावा, 17 मार्च को औरंगजेब के मकबरे को गिराए जाने के मुद्दे पर नागपुर में दंगे भड़क उठे। उसके बाद औरंगजेब के मकबरे को ढक दिया गया। नागपुर और मराठवाड़ा में भी तनाव बढ़ने के संकेत हैं। इसलिए, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) दिल्ली की एक टीम छत्रपति संभाजीनगर शहर में प्रवेश कर चुकी है। टीम ने परभणी, जालना और नांदेड़ का भी दौरा किया है तथा वहां संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही है। खबर है कि इस मामले में एटीएस अधिकारियों की मदद ली जा रही है।



